शीर्षक-अन्य पिछड़ा वर्ग: ग्रामीण परिदृश्य एक अवलोकन

Authors

  • ओमप्रकाश दूबे असिस्टेंट प्रोफेसर, समाजशास्त्र विभाग, राजा श्रीकृष्ण दत्त स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जौनपुर, उत्तर प्रदेश, भारत

DOI:

https://doi.org/10.63671/ijsssr.v1i2.411

Keywords:

गांव, ग्रामीण जीवन, जाति व्यवस्था, अर्थव्यवस्था, कृषि, राजनीति, पंचायती राज, सामाजिक संबंध, लघु परम्परा, वृहत परम्परा, विकास योजनाएं

Abstract

यह आलेख भारतीय गांवों के बहुआयामी परिदृश्य का अवलोकन प्रस्तुत करता है, जिन्हें भारत की आत्मा माना जाता है और जिसकी अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि है। गांवों का सामाजिक जीवन जाति, नातेदारी, अर्थव्यवस्था, राजनीति और धर्म के इर्द-गिर्द संरचित होता है। यद्यपि आंतरिक रूप से भिन्न, भारतीय गांवों में कई समान विशेषताएं हैं। कृषि ग्रामीणों की आय का प्रमुख स्रोत है, और गांव शहरों से दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति और मौसमी फसलों के माध्यम से आर्थिक रूप से जुड़े हुए हैं। साप्ताहिक बाजारों और मेलों ने गांवों को बाहरी दुनिया से जोड़ा है, जो आर्थिक और सांस्कृतिक दोनों भूमिकाएं निभाते हैं। पूंजीवाद और शहरीकरण की प्रक्रियाओं ने गांवों को बड़े आर्थिक तंत्र का हिस्सा बनाया है। ऐतिहासिक रूप से, गांव कभी भी पूरी तरह से स्वावलंबी नहीं रहे, बल्कि हमेशा बड़े समाज और सभ्यता का हिस्सा रहे हैं। ब्रिटिश शासन ने गांव और शासक के संबंधों को बदला और गांवों को एक प्रभावी प्रशासन से जोड़ा। स्वतंत्रता के बाद, संसदीय लोकतंत्र और वयस्क मताधिकार ने गांवों को राजनीतिक व्यवस्था के साथ और अधिक एकीकृत किया। पंचायती राज व्यवस्था, विशेष रूप से 73वें संशोधन के बाद, स्थानीय शासन को मजबूत करते हुए गांवों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जाति व्यवस्था गांव के सामाजिक ताने-बाने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो अनुक्रम और कभी-कभी भूमि स्वामित्व से जुड़ी है। धार्मिक अध्ययन में लघु और वृहत परम्पराओं के बीच लेन-देन, जैसे कि संस्कृतिकरण, गांवों में स्पष्ट है। गांवों ने विकास की योजनाओं के माध्यम से परिवर्तन का अनुभव किया है जैसे कि भूमि सुधार, सड़कों का विकास, कृषि तकनीक में सुधार, और विभिन्न सरकारी कार्यक्रम। इन प्रयासों के बावजूद, गांव अभी भी आधारभूत सुविधाओं और अंधविश्वास जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। कुल मिलाकर, गांवों का स्वरूप समय के साथ बदल गया है, जो बड़े राष्ट्रीय और वैश्विक परिवर्तनों से प्रभावित हुआ है।

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Published

2023-09-30

How to Cite

दूबे ओमप्रकाश. (2023). शीर्षक-अन्य पिछड़ा वर्ग: ग्रामीण परिदृश्य एक अवलोकन. International Journal of Science and Social Science Research, 1(2), 269-275. https://doi.org/10.63671/ijsssr.v1i2.411

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