चंबल घाटी की बागी समस्या का गांधीवादी समाधान: एक अध्ययन

Authors

  • मनोज सिंह
  • ए.एस नरवरिया

DOI:

https://doi.org/10.63671/ijsssr.v2i2.120

Keywords:

चंबल घाटी, बागी, आत्मसमर्पण, गांधीवाद, हृदय परिवर्तन

Abstract

प्रस्तुत शोध पत्र में चंबल घाटी की बागी समस्या का गांधीवादी विचारको द्वारा किए गए समाधान का अन्वेषण एवं विश्लेषण करना है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद गांधीवादी विचारक विनोबा भावे, जयप्रकाश नारायण, एस.एन सुब्बाराव आदि ने महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा व प्रेम के संदेशों को फैलाया। जब इन गांधीवादी विचार को चंबल घाटी की बागी समस्या के विकराल रूप का ज्ञान हुआ तो उन्होंने बागी समस्या को समाप्त करने का बीड़ा उठाया। 1960 में बिनोवा भावे जी के समक्ष बीस बागियों ने आत्मासमर्पण कर अहिंसा के मार्ग को अपनाया। गांधीवादी विचारको द्वारा चंबल घाटी में इस समस्या के समाधान के लिए चंबल घाटी शांति मिशन, महात्मा गांधी सेवा आश्रम आदि संगठनों की स्थापना कर रचनात्मक कार्य किए।
इन गांधीवादी विचारको ने आत्मसमर्पण की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने, बागी एवं उनके परिजनों का पुनर्वास करना तथा स्थानीय युवा स्वयंसेवकों के साथ मिलकर उनके कल्याण और स्थानीय पर्यावरण की रक्षा के लिए कार्य किए। सामूहिक आत्मसमर्पण की इस ऐतिहासिक घटना ने विश्व को यह संदेश दिया कि गांधीवादी सिद्धांतों दया, अहिंसा और प्रेम द्वारा संगठित अपराध जैसे- आतंकवाद, उग्रवाद, नक्सलवाद आदि को समाप्त किया जा सकता है। प्रमुख गांधीवादी एस.एन सुब्बाराव जी का मानना था कि स्थाई सफलता केवल अहिंसा के माध्यम से आती है और हमने 654 बागियों का आत्मसमर्पण करा कर अहिंसा के सिद्धांत की उपयोगिता को साबित किया। जिल कैर हैरिस ने कहा है कि “ गांधीवादी माध्यमों से हिंसा के चक्र को तोड़ा जा सकता है, हिंसक घटनाओं को रोका जा सकता है और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को अस्तित्व में लाया जा सकता है।”
इस प्रकार हम कह सकते हैं कि गांधीवादी माध्यमों सत्य, प्रेम व अहिंसा द्वारा बागी समस्या जैसी सामूहिक एवं संगठित अपराध को समाप्त कर सकते हैं। समाज और सरकार कुछ रियायत कर समाज की मुख्य धारा से पथभ्रष्ट हुई लोगों को पुनः सामान्य जीवन में लाया जा सकता है। इन समस्याओं के निर्माण से बचने वाले समय व साधनों का प्रयोग सामाजिक न्याय व मानव कल्याणकारी कार्यक्रमों में लगाकर देश के विकास में और गति प्रदान की जा सकती है।

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Published

2024-09-26

How to Cite

चंबल घाटी की बागी समस्या का गांधीवादी समाधान: एक अध्ययन. (2024). International Journal of Science and Social Science Research, 2(2), 300-304. https://doi.org/10.63671/ijsssr.v2i2.120

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