भारतीय कृषि: वर्तमान चुनौतियाँ एवं समाधान

Authors

  • अनुपमा सिंह शोधार्थी, इतिहास विभाग, राजा हरपाल सिंह स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सिंगरामऊ, जौनपुर वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय,जौनपुर
  • मनोज कुमार सिंह असिस्टेंट प्रोफ़ेसर, इतिहास विभाग, राजा हरपाल सिंह स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सिंगरामऊ, जौनपुर वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय,जौनपुर

DOI:

https://doi.org/10.63671/ijsssr.v1i2.36

Keywords:

भारत का इतिहास, जलवायु, खाद्य

Abstract

स्वातंत्र्योत्तर काल में भारत में कृषि क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन देखने को मिले हैं। आज़ादी के समय जहाँ भारत को “भोजन की गंभीर कमी वाले राष्ट्र” के रूप में देखा जाता था और उसे अपनी खाद्य आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए विदेशी सहायता पर निर्भर रहना पड़ता था, वहीं 1960 के दशक के दौरान हरित क्रांति ने देश को आत्म-निर्भर बनाने के साथ ही “खाद्य-अधिशेष राष्ट्र” का दर्ज़ा दिलाने में मदद की।
भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि और समग्र विकास में कृषि की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण रही है। हालाँकि नित्य-प्रति बदलते परिवेश और आवश्यकताओं को देखते हुए इस भूमिका को पुनर्परिभाषित एवं क्रियान्वित किए जाने की आवश्यकता है जिससे कि 21वीं सदी की चुनौतियों का सामना और नए अवसरों का दोहन किया जा सके। कार्य-बल में वृद्धि एवं विनिर्माण क्षेत्र में अधिक रोज़गार सृजन न हो पाने की स्थिति में कृषि क्षेत्र का महत्त्व और भी बढ़ गया है। ऐसे में कृषि क्षेत्र में लाभकारी रोजगार के नए अवसर तलाशने की आवश्यकता है।

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Published

2023-09-30