उच्चतर माध्यमिक स्तर के हिन्दी माध्यम के ग्रामीण व शहरी छात्र -छात्राओं के मध्य समायोजन क्षमता का तुलनात्मक अध्ययन
DOI:
https://doi.org/10.63671/ijsssr.v1i2.40Keywords:
शोध छात्र, अनुसंधान, साहित्यAbstract
शिक्षा किसी भी देश या समाज के वर्तमान को विकसित और भविष्य को उज्जवल बनाने की आधारशिला होती है। शिक्षा के माध्यम से ही छात्र्ा.छात्र्ााओं व देश व समाज के सर्वांगीण विकास करते हुए उसकी संस्कृति का संरक्षण और सभ्यता को आगे बढ़ाया जाता है। एवं शिक्षा ही समाज कें सुख.समृद्धि लाने का कार्य करती है। चार्वाक दर्शन के अनुसार भी शिक्षा वह है जो मनुष्य को सुखपूर्वक जीवन जीने योग्य बनाती है।प्ल्ोटो के शब्दों में ष्ष्शिक्षा से अभिप्राय उस प्रशिक्षण से है जो अच्छी आदतों के द्वारा बच्चों में अच्छी नैतिकता का विकास करती है।ष्ष् उपरोक्त कथन से स्पष्ट है कि शिक्षा वह माध्यम है जिसके द्वारा बालकों व व्यक्तियों को शिक्षण.प्रशिक्षण देकर उनका सर्वोत्तम विकास किया जा सकता है। जिससे वे तेजी से परिवर्तनशील समाज में राष्ट्र में अपने आपको समायोजित करते हुए अपना व परिवार एवं समाज का विकास करने में सक्षम हो सके।
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