अवधारणा मानचित्रण पद्धति का छात्रों की विज्ञान शिक्षण के उपलब्धि पर प्रभावशीलता का अध्ययन
अवधारणा मानचित्रण पद्धति का छात्रों की विज्ञान शिक्षण के उपलब्धि पर प्रभावशीलता का अध्ययन
DOI:
https://doi.org/10.63671/ijsssr.v3i2.457Keywords:
विज्ञान शिक्षा , अवधारणा मानचित्रण , उपलब्धि परीक्षण (सीआरटी), अर्ध-प्रयोगात्मक डिज़ाइन -प्रीटेस्ट-पोस्टटेस्ट , पारंपरिक शिक्षण पद्धति , लिंग-निरपेक्षता , शैक्षणिक उपलब्धिAbstract
यह अध्ययन विज्ञान शिक्षा में अवधारणा मानचित्रण पद्धति की प्रभावशीलता को परखने के लिए किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य विज्ञान की चयनित इकाइयों में छात्रों की शैक्षणिक उपलब्धि को मापने के लिए एक मान्य और विश्वसनीय उपलब्धि परीक्षा (सीआरटी) का निर्माण करना, अवधारणा मानचित्रण पद्धति की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करना, तथा लिंग के संदर्भ में इसके प्रभाव का अध्ययन करना था। अध्ययन हेतु तीन शोध परिकल्पनाएँ और उनके अनुरूप शून्य परिकल्पनाएँ बनाई गईं, जिन्हें 0.05 के महत्व स्तर पर परखा गया।
अध्ययन में अर्ध-प्रयोगात्मक (quasi-experimental) शोध डिज़ाइन, विशेषकर गैर-समतुल्य प्रीटेस्ट-पोस्टटेस्ट नियंत्रण समूह डिज़ाइन का उपयोग किया गया। इसमें पहले से निर्धारित कक्षा समूहों को प्रयोगात्मक एवं नियंत्रण समूह के रूप में लिया गया। प्रयोगात्मक समूह को अवधारणा मानचित्रण पद्धति से तथा नियंत्रण समूह को पारंपरिक पद्धति से पढ़ाया गया। दोनों समूहों को पूर्व परीक्षण (pre-test) और पश्च परीक्षण (post-test) दिया गया, जिससे उपलब्धि में आए अंतर को मापा गया।
शोध निष्कर्षों से स्पष्ट हुआ कि निर्मित सीआरटी विज्ञान की चयनित इकाइयों में उपलब्धि मापने में प्रभावी रही। अवधारणा मानचित्रण पद्धति से पढ़ाए गए छात्रों की विज्ञान में उपलब्धि पारंपरिक पद्धति से पढ़ाए गए छात्रों की तुलना में सार्थक रूप से अधिक थी। लिंग के आधार पर उपलब्धि में कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं पाया गया, जिससे यह निष्कर्ष निकला कि यह पद्धति लड़कों और लड़कियों दोनों के लिए समान रूप से प्रभावी है। इस प्रकार, अध्ययन ने सिद्ध किया कि विज्ञान शिक्षा में अवधारणा मानचित्रण पद्धति न केवल छात्रों की समझ और ज्ञान-संरचना को सुदृढ़ बनाती है, बल्कि यह लिंग-निरपेक्ष भी है, जिससे इसे व्यापक शैक्षिक संदर्भ में अपनाया जा सकता है।
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