महात्मा गांधी की शैक्षिक दृष्टि और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020ः एक समीक्षात्मक अध्ययन
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https://doi.org/10.63671/ijsssr.v2i4.321Keywords:
महात्मा गांधी, शैक्षिक दृष्टि, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, आत्मनिर्भरता, नैतिक शिक्षा, समग्र विकासAbstract
इस शोध पत्र में महात्मा गांधी की शैक्षिक दृष्टि का मूल आधार आत्मनिर्भरता, नैतिकता और व्यवहारिक शिक्षा था। वे शिक्षा को केवल सूचनात्मक ज्ञान तक सीमित रखने के पक्षधर नहीं थे, बल्कि इसे जीवन उपयोगी बनाने पर जोर देते थे। उन्होंने बुनियादी शिक्षा (नयी तालीम) की संकल्पना प्रस्तुत की, जिसमें श्रम आधारित शिक्षा को महत्व दिया गया। उनका मानना था कि शिक्षा केवल रोजगार के लिए नहीं, बल्कि समाज में एक सशक्त और जागरूक नागरिक के निर्माण के लिए होनी चाहिए। वे मातृभाषा में शिक्षा के समर्थक थे, ताकि बच्चे सहज रूप से ज्ञान अर्जित कर सकें।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 शिक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह नीति समग्र और व्यावसायिक शिक्षा पर बल देती है, जिससे विद्यार्थियों में कौशल विकास हो सके। गांधीवादी दृष्टिकोण की तरह, यह नीति भी मातृभाषा में प्रारंभिक शिक्षा देने की सिफारिश करती है और नैतिक मूल्यों को पाठ्यक्रम में शामिल करने पर जोर देती है। इसके अलावा, व्यावसायिक शिक्षा और कौशल-आधारित प्रशिक्षण को विद्यालयी शिक्षा में समाहित करने की पहल गांधी जी की शिक्षा संबंधी अवधारणा से मेल खाती है।
हालांकि, आधुनिक तकनीकी युग में गांधीवादी शिक्षा को पूरी तरह लागू करना कठिन है। डिजिटल और तकनीकी शिक्षा के बढ़ते प्रभाव के कारण श्रम-आधारित शिक्षा का दायरा सीमित होता जा रहा है। फिर भी, आत्मनिर्भरता, नैतिक शिक्षा और व्यावहारिक ज्ञान के सिद्धांत आज भी प्रासंगिक बने हुए हैं।
इस अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में गांधीवादी शिक्षा के कई मूल तत्वों को आधुनिक संदर्भ में पुनर्परिभाषित किया गया है। यदि इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, तो यह नीति भारतीय शिक्षा प्रणाली को अधिक समावेशी और व्यावहारिक बना सकती है।
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