भारत में भक्ति आंदोलन: सामाजिक संरचना के परिवर्तन और सांस्कृतिक पुनर्जागरण में इसकी भूमिका
DOI:
https://doi.org/10.63671/ijsssr.v2i3.196Keywords:
भक्ति आंदोलन, सामाजिक संरचना, जाति प्रथा, धार्मिक सहिष्णुता एवं सांस्कृतिक पुनर्जागरणAbstract
भक्ति आंदोलन ने मध्यकालीन भारत की सामाजिक संरचना और सांस्कृतिक परिवेश में गहरा प्रभाव डाला। यह आंदोलन उस समय उभरा जब सामाजिक असमानता, जाति प्रथा और धार्मिक कट्टरता अपने चरम पर थीं। भक्ति संतों जैसे कबीर, तुलसीदास, मीराबाई और गुरु नानक ने धर्म के जटिल रीति-रिवाजों और जाति आधारित विभाजन के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने समानता, सद्भाव और भाईचारे के मूल्यों को पुनर्स्थापित करने का प्रयास किया। भक्ति आंदोलन ने निम्न जातियों और महिलाओं को सामाजिक और धार्मिक रूप से सशक्त होने का अवसर प्रदान किया। इस आंदोलन ने जाति आधारित भेदभाव को चुनौती दी और सभी मनुष्यों की समानता पर जोर दिया। भक्ति संतों की वाणी में सामाजिक समरसता और आत्मीयता की झलक थी, जो जातीय और सांस्कृतिक बंधनों को शिथिल करती थी। इसके परिणामस्वरूप समाज में धार्मिक सहिष्णुता और सामाजिक एकता का प्रसार हुआ। भक्ति आंदोलन ने न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में व्यापक बदलाव किए। इसने भारतीय समाज को एक नया दृष्टिकोण प्रदान किया जो समानता और भक्ति पर आधारित था। यह शोध पत्र भक्ति आंदोलन के सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभावों का विश्लेषण करते हुए, भारतीय समाज में इसके दीर्घकालिक योगदान को रेखांकित करता है।
Downloads
Published
Issue
Section
License
Copyright (c) 2024 International Journal of Science and Social Science Research

This work is licensed under a Creative Commons Attribution 4.0 International License.
How to Cite
Similar Articles
- देवेन्द्र यादव, अनिल कुमार, वृत्तिक पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत विद्यार्थियों की समायोजन क्षमता का अध्ययन , International Journal of Science and Social Science Research: Vol. 1 No. 4: January-March 2024
- पुष्पांजली, भारतीय शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में विष्णुपुर घराने की भूमिका , International Journal of Science and Social Science Research: Vol. 2 No. 2: July-September 2024
- सविता यादव, सुशील कुमार गुप्ता, उत्तर प्रदेश के शासकीय एवं अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों की अध्ययन आदतों का तुलनात्मक अध्ययन , International Journal of Science and Social Science Research: Vol. 2 No. 3: October-December 2024
- विशाल कुमार गुप्ता, सुशील कुमार गुप्ता, जौनपुर जिले के स्नातकोत्तर स्तर कला वर्ग के छात्रों एवं छात्राओं का अधिवास (ग्रामीण एवं नगरीय) के आधार पर आधुनिकता के प्रति अभिवृत्ति का तुलनात्मक अध्ययन , International Journal of Science and Social Science Research: Vol. 2 No. 3: October-December 2024
- अमित कुमार जायसवाल, मयानन्द उपाध्याय, भारतीय समाज में महिला सशक्तिकरण एवं आरक्षण नीति , International Journal of Science and Social Science Research: Vol. 1 No. 2: July-September 2023
- रोहिताश सिंह, योगेश कुमार, प्राथमिक स्तर पर शिक्षकों के हिन्दी विषयवस्तु शिक्षण व्यवहार का तुलनात्मक अध्ययन , International Journal of Science and Social Science Research: Vol. 2 No. 1: April-June 2024
- चन्द्र शेखर, उच्चतर माध्यमिक स्तर के हिन्दी माध्यम के ग्रामीण व शहरी छात्र -छात्राओं के मध्य समायोजन क्षमता का तुलनात्मक अध्ययन , International Journal of Science and Social Science Research: Vol. 1 No. 2: July-September 2023
- सचिन कुमार वर्मा, आज़ादी का अमृत महोत्सवः बाल गंगाधर तिलक , International Journal of Science and Social Science Research: Vol. 1 No. 2: July-September 2023
- संजीत कुमार सिंह, कुशीनगर जनपद में सेवाकेन्द्रों का उद्भव एवं विकास , International Journal of Science and Social Science Research: Vol. 1 No. 2: July-September 2023
- राजदेव सिहं, विधि और न्याय का समकालीन विश्लेषण ”न्याय कभी भी दिया नहीं जाता है, यह एक ऐसा कार्य है जिसे हमेशा प्राप्त करना होता है।” फ्रेडरिक ऐंजल , International Journal of Science and Social Science Research: Vol. 1 No. 3: October-December 2023
You may also start an advanced similarity search for this article.
