जौनपुर जिले के स्नातकोत्तर स्तर कला वर्ग के छात्रों एवं छात्राओं का अधिवास (ग्रामीण एवं नगरीय) के आधार पर आधुनिकता के प्रति अभिवृत्ति का तुलनात्मक अध्ययन

Authors

  • विशाल कुमार गुप्ता शोध छात्र – राजा श्री कृष्ण दत्त स्नातकोत्तर, महाविद्यालय, जौनपुर, उत्तर-प्रदेश
  • सुशील कुमार गुप्ता असिस्टेंट प्रोफेसर शिक्षा संकाय - राजा श्री कृष्ण दत्त स्नातकोत्तर, महाविद्यालय, जौनपुर, उत्तर-प्रदेश

DOI:

https://doi.org/10.63671/ijsssr.v2i3.190

Keywords:

स्नातकोत्तर स्तर के छात्र, जौनपुर, उत्तर प्रदेश, ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्र के छात्र

Abstract

आधुनिक समाज में शिक्षित छात्र एवं छात्राओं की भूमिका पिछड़ी जाति का प्रश्न अब स्पष्ट हो जाता है क्योंकि देश के विकास कार्यक्रमों का भार अब इन पर ही है। राष्ट्र के युवक और युवतियों को शिक्षित करके ही हम राष्ट्र के कल्याणकारी, प्रजातांत्रिक, समाजवादी मूल्य का विकास कर सकते हैं क्योंकि यही युवक और युवतियाँ बच्चों में अच्छी आदतों का निर्माण, स्वस्थ मानसिक विकास तथा उनमें लोकतांत्रिक नागरिक गुणों का विकास कर सकते हैं। इन्हीं गुणों से ही बालक का सर्वांगीण विकास होगा। परम्परागत समाज में पिछड़ापन, रूढ़िवादिता, प्राचीन मूल्य तथा जीवन शैलियों का प्रचलन रहा है। भारत जैसे विशालकाय विकासशील राष्ट्र में परम्परागत सामाजिक पद्धति से काम नहीं चलेगा क्योंकि अंधविश्वास, रूढ़ियाँ आधुनिकता के बाधक तत्व होते हैं। इसलिए समाज तथा देश के हित के लिए पिछड़ी जाति के छात्रों को शिक्षित, प्रशिक्षित करके इनमे आधुनिक सामाजिक मूल्यों की स्थापना करनी होगी। जिससे राष्ट्र को परम्परागत सामाजिक तथा सांस्कृतिक कुरीतियों से बचाया जा सके। इसको बदलते हुए सामाजिक व्यवस्था तथा भावी माँगों को ध्यान में रखते हुए जरूरी मूल्यों, शिक्षा का चयन करना होगा ताकि सामाजिक क्रान्ति का रूप न ले सके। इसलिए जब तक समाज का पिछड़ा वर्ग आधुनिक दृष्टिकोण नहीं अपनाता तब तक यह सामाजिक मूल्य खरें नहीं उतरेंगे। इसके लिए आवश्यक है कि समाज के पिछड़े वर्ग के छात्रों को नवीन पाठ्यक्रमों के माध्यम से
आधुनिकता सम्बन्धी प्रशिक्षण दिया जाए। जिससे वह अपनी शारीरिक, मानसिक क्षमता का उपयोग समाज तथा राष्ट्रहित में कर सके।

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Published

2024-11-26