गाजियाबाद जनपद के मुरादनगर विकासखंड के प्राथमिक विद्यालयो के अध्यापकों की दृष्टिकोण में मध्याह्न भोजन योजनाः जागरूकता, दृष्टिकोण, क्रियान्वयन की समस्याएँ तथा विद्यालयी वातावरण पर प्रभाव का एक अध्ययन

Authors

  • Seema Devi Research Scholar, Department of Sociology, Mahila PG College Kidwai Nagar Kanpur, India
  • Dr. Preeti Dwivedi Associate Professor, Department of Sociology, Mahila PG College Kidwai Nagar Kanpur, India

DOI:

https://doi.org/10.63671/ijsssr.v4i1.593

Keywords:

गाजियाबाद, नगर निगम, प्राथमिक विद्यालयों, मध्यान्ह भोजन योजना

Abstract

इस अध्ययन शोध का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जनपद के मुरादनगर विकासखंड के प्राथमिक विद्यालयो में कार्यरत अध्यापकों के मध्याह्न भोजन योजना के प्रति दृष्टिकोण जागरूकता, क्रियान्वयन, समस्याएँ, तथा विद्यालयी वतावरण पर प्रभाव का विश्लेषण किया गया है।
मध्याह्न भोजन योजना भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण समाजिक कल्याण योजना है, जिसका मुख्य उद्देश्य प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों के पोषण स्तर में सुधार करना, विद्यालयों में नामांकन एंव उपस्थिति बढ़ाना तथा समाजिक समानता को प्रोत्साहित करना है। योजना का सफल क्रियान्वयन में अध्यापकों की भूमिका अत्यतं महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे न केवल शैक्षिक गतिविधि से जुड़े होते है, बल्कि योजना के संचालन निगरानी एवं अनुशासन बनाये रखने में सक्रिय भागीदारी निभाते हैं।
इस अध्ययन शोध में गाजियाबाद जिले के मुरादनगर ब्लाक में स्थित 102 प्राथमिक विद्यालयों में से 60 को शामिल किया गया है जिनमे से 150 अध्यापकों का चयन किया गया है। शिक्षकों से साक्षात्कार अनुसूची के माध्यम से आकड़े एकत्रित किये गए है।अध्ययन के निष्कर्षों से ज्ञात हुआ कि अधिकांश अध्यापक मध्याह्न भोजन योजना को विद्यार्थियों के स्वास्थ्य एवं विद्यालयी उपस्थति में वृद्दि के लिए उपयोगी मानते हैं। साथ ही, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि योजना से सामाजिक समरसता का बढ़ावा मिलता हैं। हालांकि कुछ अध्यापकों ने भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता, समय-प्रबंधन तथा शैक्षिणिक कार्य में व्यवधान जैसी समस्याओं की ओर भी ध्यान आर्किषित किया है। 
इस अध्ययन से यह निष्कर्ष प्राप्त होता है कि यदि मध्यान्ह भोजन के क्रियान्वयन में प्रशासनिक सहयोग, पर्याप्त संशाधन, नियमित निरक्षण तथा अध्यापकों पर अतिरिक्त गैर-शैक्षणिक दायित्व का बोझ कम किया जाय, तो यह योजना अधिक प्रभावी रूप से अपने उद्देश्यों को प्राप्त कर सकती है। यह शोध भविष्य में निति निर्माण एवं योजना के सुधार हेतु उपयोगी सिद्ध हो सकता हैं।

References

अफरीदी, एफ. (2010). बाल कल्याण कार्यक्रम और बाल पोषण, वल्र्ड डेवलपमेंट।

द्रेज़, जे., एवं गोयल, ए. (2003). मिड-डे मील का भविष्यः आर्थिक एवं राजनीतिक विश्लेषण. इकोनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली।

द्रेज़, जे., एवं सेन, ए. (2013). एन अन्सर्टेन ग्लो इंडिया एंड इट्स कॉन्ट्राडिक्शन्स. पेंग्विन बुक्स।

फुलर, एम. (2007). एजुकेशन फॉर ऑल और सुधार का नया अर्थ. टीचर्स कॉलेज प्रेस।

गोयला, ए. आर. (2011). कौन-सा स्कूल चुना जाता है? ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस।

गोयला, ए. आर., एवं बंद्योपाध्याय, के. (2010). भारत में प्राथमिक शिक्षा तक पहुंचः मुद्दे और चुनौतियाँ. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस।

खेड़ा, आर. (2006). प्राथमिक विद्यालयों में मिड-डे मीलः उपलब्धियाँ और चुनौतियाँ. इकोनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली, 41(46) 4742-4750

खेड़ा, आर. (2011). भारत में मिड-डे मीलः समीक्षा और प्रमाण, सोशल चेंज, 41(3), 373-400

किंगडन, जी. जी. (2007). भारत में स्कूली शिक्षाः प्रक्रिया और चुनौतियाँ, ग्लोबल पॉवर्टी रिसर्च ग्रुप, ऑक्सफोर्ड।

किंगडन, जी. जी., एवं मुज़म्मिल, एम. (2009). भारत में निजी विद्यालयः वृद्धि, प्रसार और प्रभाव. इकोनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली, 44(17), 23-35

एनसीईआरटी। (2014). शिक्षक एवं विद्यालय प्रभावशीलता अध्ययन. राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, नई दिल्ली।

योजना आयोग। (2014). बारहवीं पंचवर्षीय योजना (2012-2017). भारत सरकार।

प्रोब रिपोर्ट। (1999). भारत में बुनियादी शिक्षाः एक क्षेत्रीय सर्वेक्षण, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस।

स्कूल मील्स ऐज़ ए सेफ्टी नेटः भारत में मध्याह्न भोजन योजना का मूल्यांकन। (2014). इकोनॉमिक डेवलपमेंट एंड कल्चरल चेंज, 62(2), 275-306

सेन, ए., एवं द्रेज़, जे. (2013). एन अन्सर्टेन ग्लोरीः इंडिया एंड इट्स कॉन्ट्राडिक्शन्स. पेंग्विन बुक्स

Downloads

Published

2026-05-19

Issue

Section

Articles