कबीरः- मानवतावादी समाज सुधारक

Authors

  • प्रेमवती शोधार्थिनी हिन्दी विभाग, राजकीय रजा स्नातकोत्तर महाविद्यालय (रामपुर) उत्तर प्रदेश

DOI:

https://doi.org/10.63671/ijsssr.v1i3.72

Keywords:

कबीर, रामचन्द्र शुक्ल, रूढ़िवादी

Abstract

जिस समय कबीरदास जी का अविर्भाव हुआ। उस समय भारत देष में भक्ति आन्दोलन की लहर प्रवल थी। हिन्दू-मुसलमानों में मतभेद चरम सीमा पर था। मुसलमानो के आगमान से हिन्दू समाज पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ा। उस समय समाज में अनेक प्रकार की बुराइयाँ व्याप्त थी। जैसे जातिगत भेदभाव हिंसा, साम्प्रदायिकता,धार्मिक पाखण्ड,छुआछुत, ऊँच-नीच रूढिवादी,अन्धविष्वास आदि। कबीरदास ने समाज में फैली इन बुराइयों को दूर करने के लिए जो मार्ग अपनाया वैसा किसी भी साधु-सन्त और भक्त ने नही अपनाया।यह कहना गलत नही होगा कि कबीर जैसा समाज सुधारक एंव मानवतावाद की स्थापना करने वाला निर्गुण भक्त कवियों में दुसरा कोई कबीर का स्थान सर्वोपरि है। कबीरदास जी ने मानव कल्याण के लिए समन्वयवादी दृष्टि अपनायी.

Downloads

Published

2023-11-10