पुरुष व महिला छात्राध्यापकों के मूल्यों का अध्ययन
DOI:
https://doi.org/10.63671/ijsssr.v4i1.605Keywords:
मूल्य, मध्यमान, मानक विचलन, मानक त्रुटि, CR मूल्यAbstract
जब हम शिक्षा की बात करते है तो शिक्षा का तात्पर्य व्यक्ति को ऐसी शिक्षा से है जिससे व्यक्ति में सामाजिक शिक्षा, सांस्कृतिक शिक्षा एवं संवेगात्मक शिक्षा का विकास हो सकें। इन सभी बातों को ग्रहण करने हेतु व्यक्ति को एक शिक्षक की आवश्यकता पड़ती है जो छात्र को सर्वागीण विकास कर सके। यहां शिक्षक की बात आती है तो इसके विषय में हम प्राचीन में अपने पुराणों को देखते है जिससे स्पष्ट होता है कि शिक्षक का स्थान महत्वपूर्ण होता था तथा शिक्षक को गुरु की महता थी तथा छात्र का स्थान गौण था। परन्तु आज की शिक्षा बाल केन्द्रित शिक्षा पद्धति हो गई है। इसका तात्पर्य यह होता है शिक्षा में जितनी भी परिवर्तन क्यों न किया जाये परन्तु शिक्षा का मूलभूत उद्देश्य यथावत बना रहता है।
प्राचीन काल में शिक्षा के माध्यम से जहां व्यक्ति के चारित्रिक एवं व्यक्तित्व का विकास होता था तथा इसका नागरिक कर्Ÿाव्यों का बोध भी कराया जाता था। प्राचीन कालीन शिक्षा पद्धति यद्यपि में यह कह सकते है कि आधुनिक शिक्षा पद्धति का रूप बदला है परन्तु मूल्य और आदर्श नहीं बदलते है इस प्रकार शिक्षा एक ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा मानव के व्यवहारों व उनके व्यवहारों में परिवर्तन लाया जा सकता हैं।
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