उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों की परीक्षा के प्रति दुश्चिंता का उनकी शैक्षणिक उपलब्धि पर पड़ने वाले प्रभाव अध्ययन
DOI:
https://doi.org/10.63671/ijsssr.v3i3.502Keywords:
परीक्षा दुष्चिंता, शैक्षणिक उपलब्धि, उच्चतर माध्यमिक विद्यार्थी, परीक्षा दबावAbstract
वर्तमान शिक्षा प्रणाली में विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धि को अत्यधिक महत्व दिया जाता है, जिसके कारण परीक्षा का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। परीक्षा के प्रति यह बढ़ता हुआ महत्व विद्यार्थियों के मन में दुष्चिंता उत्पन्न करता है, जो एक सामान्य किन्तु गंभीर मनोवैज्ञानिक समस्या के रूप में उभर रही है। विशेष रूप से उच्चतर माध्यमिक स्तर पर, जहाँ भविष्य की दिशा निर्धारित होती है, विद्यार्थियों पर अच्छे अंक प्राप्त करने का दबाव अधिक होता है। परीक्षा दुष्चिंता ऐसी मानसिक अवस्था है, जिसमें विद्यार्थी परीक्षा के समय तनाव, भय तथा असुरक्षा का अनुभव करते हैं। यह स्थिति उनकी एकाग्रता, स्मरण शक्ति तथा आत्मविश्वास को प्रभावित करती है, जिससे उनकी वास्तविक क्षमता के अनुरूप शैक्षणिक प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है। यदि दुष्चिंता का स्तर अधिक हो, तो यह विद्यार्थियों की उपलब्धि में बाधा उत्पन्न करती है, जबकि संतुलित स्तर की दुष्चिंता कभी-कभी प्रेरक के रूप में भी कार्य कर सकती है। अतः यह आवश्यक हो जाता है कि परीक्षा दुष्चिंता के स्वरूप एवं उसके प्रभाव को समझा जाए, ताकि विद्यार्थियों के लिए एक अनुकूल एवं सहयोगात्मक शैक्षिक वातावरण निर्मित किया जा सके। प्रस्तुत अध्ययन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है, जो विद्यार्थियों की परीक्षा दुष्चिंता एवं उनकी शैक्षणिक उपलब्धि के मध्य संबंध को समझने का आधार प्रदान करता है।
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