कबूतरा जनजाति की संघर्ष गाथा

Authors

  • अनुज कुमार शुक्ल सहायक आचार्य हिंदी विभाग कुटीर पी. जी . कॉलेज चक्के जौनपुर

DOI:

https://doi.org/10.63671/ijsssr.v1i4.211

Keywords:

महिलाओं का शोषण, कबूतरा जनजाति, अल्मा कबूतरी

Abstract

मैत्रेयी पुष्पा के सुप्रसिद्ध उपन्यास ‘अल्मा कबूतरी’ की कथावस्तु बुन्देलखण्ड की विलुप्त होती जनजाति पर आधारित है । इस उपन्यास में कबूतरा जनजाति में जन्मी ‘अल्मा’ की संघर्ष कथा है । कबूतरा जनजाति किस तरह जीने के लिए संघर्ष कर रही है, मसलन रोटी, कपड़ा, मकान की उपलब्धता ही उनके जीवन का लक्ष्य है । उसी रोटी-कपड़ा के जुगाड़ में कितनी जिन्दगियाँ असमय काल कवलित हो गई और किस तरह आदिवासियों के जीवन का अंत हो रहा है, इस तड़प और बैचेनी को प्रस्तुत किया गया है । मैत्रेयी पुष्पा के लेखन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे अपनी कथा वस्तु का चुनाव लोक से ही करती हैं । वंचित समूह की आवाज साहित्य की आवाज बने, यह उनका प्रयास रहता है । इन वंचित समूहों में आदिवासी स्त्री की समस्या को उन्होंने पुरजोर तरीके से उठाया है । ‘‘औरत कितनों के पास होती है ? जंगलिया तकदीर का सिकंदर, कितना अभागा है!’’1

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Published

2024-01-09

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कबूतरा जनजाति की संघर्ष गाथा. (2024). International Journal of Science and Social Science Research, 1(4), 80-83. https://doi.org/10.63671/ijsssr.v1i4.211

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