वर्तमान में ज्ञान
DOI:
https://doi.org/10.63671/ijsssr.v3i2.437Keywords:
ज्ञान, मृत्यु, जीवनAbstract
ज्ञान की पराकाष्ठा या गुणवत्ता को प्रदर्शित करने हेतु अनेक सुभाषित कहे गए हंै। ’विद्या ददाति विनयम ’ 1, सा विद्या या विमुक्तये’ 2, ’विद्या नरस्य रूपमधिकम् ’3 ,‘येषां न विद्या न तपो न दानम् ’ 4, विद्या सा वैकृता ‘, ’विद्या धनम् सर्व धनम् प्रधानम् ‘ 5, ’शिक्षा वह शेरनी का दूध है इसे जो पियेगा वह दहाड़ेगा’ 6 ज्ञान अथाह है, अनंत है, चिर स्थाई है। ज्ञान मनन, चिंतन तथा ध्यान का विषय है। ज्ञान में शक्ति तो इतनी है, जो किसी भी मृत शरीर में जीवन का संचार कर दे। ज्ञान में ही शक्ति है जो किसी के बेरंग पड़े जीवन में विविध रंग भर दे। ज्ञान हमें जीवन जीने की कला सिखाता है। हमें आनंद के पथ पर ले जाता है। धन का स्रोत है। कीर्ति का आधार है। ईश्वर का वरदान है। ज्ञान है तो सब कुछ पाया जा सकता है, ज्ञान नहीं तो कुछ भी नहीं है। जितने प्रकार का मानव होता, ज्ञान भी उतने ही प्रकार का समझा जा सकता है। मानव जन्म लेते ही ज्ञान प्राप्त करने लगता है और मृत्युपर्यन्त करता ही रहता है। ज्ञान अपना स्वरूप समयानुकूल बदलता रहता है। जैसे जल की धारा अपने रूप को तट के अनुकूल बना लेती है। उसी प्रकार ज्ञान मनुष्य जीवन को सुचारु एवं सुगम जीवन जीने हेतु विविध कलाओं को सिखाता है। जैसे शिष्टाचार, संर्घषपूर्ण जीवन की समझ तथा धनार्जन की शिक्षा आदि में पारंगत होना सभी कुछ प्रारम्भिक दौर में सीखकर सम्पूर्ण जीवन के लिए तैयार होते हंै। ग्रहस्थ जीवन में भूतकालीन पीढ़ी एवं भविष्यकालीन पीढ़ी का पालन पोषण करते आदि समय बीतता है। आज का मानव जरावस्था तक जीवन जीने के विशेष ढ़ग को अपनाता रहता है। ऐसा लगता है कि ज्ञान भौतिकता से इतर कुछ है ही नहीं। जबकि प्राचीन काल में मानव के ज्ञान प्राप्ति का तरीका ही कुछ अलग था। बच्चों को अधिकांशतः घर तथा समाज से दूर रखकर भौतिक, नैतिक तथा आध्यात्मिक आादि शिक्षा दी जाती थी। इस समय की शिक्षा आधुनिक और प्राचीन समान ही है परन्तु प्रौढा़वस्था अलग थी जो घर एवं वन के बीच की कड़ी कही जा सकती थी। और जीवन के अंतिम चरण में घर छोड़कर पूर्णतः वन में रहकर आध्यात्मिक शिक्षा ग्रहण करते तथा ’सा विद्या या विमुक्तये’ के पथ पर अग्रसर होना सीखते थे। अर्थात् कहा जा सकता है कि योग्यतानुरूप शिक्षा ग्रहण करते हुए चारो आश्रमों में जीवनयापन करते थे।
Downloads
Published
Issue
Section
License
Copyright (c) 2025 International Journal of Science and Social Science Research

This work is licensed under a Creative Commons Attribution 4.0 International License.
How to Cite
Similar Articles
- तारकेष्वर गुप्ता, विद्यार्थियों को विचारवान बनाने में शिक्षक की भूमिका , International Journal of Science and Social Science Research: Vol. 1 No. 1: April-June 2023
- रामानन्द अग्रहरि, अवधेश चन्द्र मिश्रा, भारतीय समाज में मीडिया का बदलता स्वरूप , International Journal of Science and Social Science Research: Vol. 1 No. 1: April-June 2023
- आनंदराव रा. शिंदे, गांधीवादी विचारसरणी: एक जागतिक वारसा , International Journal of Science and Social Science Research: Vol. 1 No. 1: April-June 2023
- त्रिपुर सुन्दरी, वैदिक साहित्य में सन्निहित कृषि प्रक्रिया की उपादेयता , International Journal of Science and Social Science Research: Vol. 1 No. 2: July-September 2023
- अरूण कुमार अग्रहरि, अशेष कुमार उपाध्याय, स्वस्थ एवं आत्मनिर्भर भारत की तरफ बढ़ते कदम , International Journal of Science and Social Science Research: Vol. 1 No. 2: July-September 2023
- रितेश कुमार श्रीवास्तव, जिला सहकारी बैंक लिमिटेड जौनपुर की स्थापना व प्रगति , International Journal of Science and Social Science Research: Vol. 1 No. 2: July-September 2023
- MD ASHRAF PERWEZ, बिहार में समावेशी शिक्षा की स्थिति , International Journal of Science and Social Science Research: Vol. 1 No. 2: July-September 2023
- Isha, Rachna Yadav, भारतीय एक्ट ईस्ट नीति और आसियान: इंडो-पेसेफिक क्षेत्रीय साझेदरी के निर्माण के विशेष सन्दर्भ में , International Journal of Science and Social Science Research: Vol. 1 No. 2: July-September 2023
- अमित कुमार जायसवाल, मयानन्द उपाध्याय, भारतीय समाज में महिला सशक्तिकरण एवं आरक्षण नीति , International Journal of Science and Social Science Research: Vol. 1 No. 2: July-September 2023
- अनुपमा सिंह, मनोज कुमार सिंह, भारतीय कृषि: वर्तमान चुनौतियाँ एवं समाधान , International Journal of Science and Social Science Research: Vol. 1 No. 2: July-September 2023
You may also start an advanced similarity search for this article.
SEMANTIC SCHOLAR 