विवाह समये पाणिग्रहण संस्कारे सप्तपदी महत्वम
DOI:
https://doi.org/10.63671/ijsssr.v3i1.425Keywords:
विवाह, पाणिग्रहण, गृहस्थस्यAbstract
वैदिक परंपरा के अन्तर्गत वर वधू के उत्तान साङ्गुष्ठ दक्षिण हाथ को अपने दाहिने हाथ से पकड़ कर यह मंत्र पढ़े।
ॐ गृभ्णामि ते सौभगत्वाय हस्तं मया पत्या जरदष्टिर्यथाऽऽसः। भगो ऽअर्यमा सविता पुरन्धिर्मह्यं त्वा ऽदुर्गार्हपत्यय देवा ।।1।। ॐ अमोऽहमस्मि सा त्वड्ढ त्वमस्यमो ऽअहम्। सेमोऽहमस्मि ऋक् त्वं द्यौरहं पृथ्वी त्वम्।।2।। ॐ तावेहि विवहावहै सह रेतो दधावहै। प्रजां प्रजान्यावहै पुत्रान् विन्द्यावहै बहून्।।3।। ॐ ते सन्तु जरदष्टयः संप्रियौ रोचिष्णू सुमनस्यमानौ। पश्येम शरदः शतं जीवेम शरदः शत श्रृृणुयाम शरदः शतम्।।4।।
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2025-06-30
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